आप भी प्रयोग करते हैं paytm? जल्द बंद होगे कई मोबाइल वॉलेट अकाउंट

paytm

अगर आप ,मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं तो आपके के लिए बुरी खबर है. आरबीआई की सख्ती की वजह से देश में अधिकतर मोबाइल वॉलेट्स जैसे paytm मार्च 2019 तक बंद हो सकते हैं. अगर मोबाइल वॉलेट बंद हुए थे तो लोगों को फिर से कैश के भरोसे रहना पड़ेगा.

दरअसल आज के दौर में लोग अक्सर पेटीएम समेत तमाम मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं. लोग मोबाइल वॉलेट की वजह से कैश साथ में रखना बंद कर दिया है. शॉपिंग हो या पेट्रोल भराना, या फिर सब्जी खरीदने तक में ग्राहक PayTm जैसे वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन जानकारों ने मार्च 2019 तक सभी मोबाइल वॉलेट्स के बंद होने की आशंका जताई है.

बंद होने का कारण

बता दें, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मोबाइल वॉलेट का संचालन करने वाली कंपनियों को अपने ग्राहकों का वेरिफिकेशन (KYC) करने के लिए फरवरी 2019 तक का समय दिया है. लेकिन इस डेडलाइन तक अधिकांश कंपनियां इस पूरा नहीं कर पाएंगी. ऐसे में इन कंपनियों के पास अपने वॉलेट बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा.

आरबीआई ने मोबाइल वॉलेट्स को अक्टूबर 2017 में निर्देश दिया था कि वे ‘नो योर कस्टमर'(KYC) गाइडलाइंस के तहत ग्राहकों की पूरी जानकारी जुटाएं. इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों की मानें तो वॉलेट बैंक कंपनियां अब तक अपने टोटल यूजर बेस के मामूली हिस्से की जानकारी ही जुटा सकी हैं और अभी उन्होंने अधिकतर यूजर्स का बॉयोमैट्रिक या फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं किया है.

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आरबीआई के आदेश के बाद सभी कंपनियां आधार बेस्ट ई-केवाईसी(KYC) के जरिए जानकारी जुटा रही थीं. लेकिन 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पाबंदी के बाद अब आधार की ई-केवाईसी पर रोक लग गई हैं. जिस वजह से अब कंपनियों को ग्राहकों का फिजिकल वेरिफिकेशन करने में परेशानी हो रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोबाइल वॉलेट कंपनियां अभी तक केवल 10 फीसदी ग्राहकों का डाटा ही जुटा पाई हैं.

गौरतलब है कि केवाईसी(KYC) के लिए वर्षों से वीडियो के जरिए वेरिफिकेशन या एक्सएमएल आधारित केवाईसी जैसे दूसरे तरीकों पर चर्चा होती रही हैं, लेकिन किसी को भी आरबीआई की हरी झंडी नहीं मिली है.

मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल में तेजी

मालूम हो कि मोबाइल वॉलेट्स इंडस्ट्री में पिछले चार साल से तेजी आई है. नोटबंदी के बाद से लोग अक्सर पेटीएम और दूसरे मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं. खासकर मोबीक्विक, फोनपे और एमेजॉन पे जैसी अधिकतर पीपीआई लाइसेंस धारक या तो यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस बिजनेस पर जोर लगा रही हैं या वे फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी से जुड़े दूसरे कामकाज करने लगी हैं.

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